हनुमान चालीसा से जुड़े ऐसे फैक्ट्स जो एक हनुमान भक्त को जरूर पता होना चाहिए ।। Facts related to Hanuman Chalisa that a Hanuman devotee must know.

Surya prakash
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दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है हनुमान जी कलयुग के बहुत ही शक्तिशाली देवताओं में से एक थे उनके जैसा ना कोई था और ना ही कभी होगा । लेकिन क्या आप लोग ये जानते है की हनुमान जी क्यों इतने शक्तिशाली थे ।आखिर उनको ये सभी शक्तियां कहां से मिली थी । हनुमान जी को कोई नहीं मार सकता था क्योंकि उनको अमरता का वरदान प्राप्त था। 

Hanuman ji 

हनुमान जी को संकट मोचन भी कहा जाता है । हनुमान जी के और भी कई नाम है जो हम आपको आगे इस आर्टिकल में बताएंगे

हनुमान जी के ये सभी नाम किसी न किसी घटना से जुड़े हैं जैसे की हमें पता है की हनुमान जी को बजरंगबली भी कहते हैं लेकिन क्या आप लोग यह जानते है की उनको यह नाम कैसे मिला ।

बजरंगबली (HNUMANN)

पुराणों में ऐसा कहा गया है की एक बार जब हनुमान जी को बहुत ही तेज भूख लगीं थी उस समय उनके महल में न उनकी माता जी थीं ना ही उसने पिता केसरी जी , तब हनुमान जी बाल्यवस्था में थे । तब हनुमान जी ने आकाश में एक चमकती हुई आकृति देखी वास्तव में वह आकृति सूर्य की थी हनुमान जी ने उनको फल समझ लिया और वह उन्हें खाने के लिए चल पड़े। जैसे जैसे वह सूर्य की तरफ बढ़ रहे थे सूर्य की आकृति और बड़ी होती जा रही थी जिस कारण उनकी भूख भी बढ़ती जा रही थी । 



हनुमान जी को  सूर्य की ओर बढ़ता देख देवता सभी चिंतित हो रहे थे। देवताओं ने हनुमान जी को रोकने के लिए बहुत प्रयत्न किए लेकिन हनुमान जी को कोई रोक नहीं पाया और अंत में हनुमान जी ने सूर्य को अपनें मुंह में समाहित कर लिया फिर चारों तरफ अंधकार छा गया सभी देवता चिंतित हो उठे । 

सभी देवता इंद्रदेव के पास गए इंद्रदेव हनुमान जी के पास गए और उन्हें 

सूर्य देव को मुक्त करने के लिए कहा लेकिन इंद्रदेव हनुमान जी के बालहठ से क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपनें शस्त्र वज्र  से हनुमान जी की ठोड़ी पर चला दिया जिसके कारण हनुमान जी मूर्छित हो कर धरती पर आ गिरे ।

तब इंद्रदेव ने अपनी भूल को सुधारने  के लिए हनुमान जी को यह वरदान दिया की आगे से भविष्य में कभी भी उसके वज्र का हनुमान जी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा । और क्योंकी उन्होंने हनुमान जी पर अपने वज्र से वार किया था इसी कारण उन्होंने हनुमान जी को बजरंगबली का नाम दिया । 

 
हनुमान चालीसा से जुड़े अदभुत रहस्य ।Amazing secrets related to Hanuman Chalisa_


हनुमान चालीसा के यह तीन रहस्य आपको अवश्य ही सोचने पर मजबूर कर देंगे । These three secrets of Hanuman Chalisa will definitely make you think...

रहस्य नंबर :1 राशि नंबर 1 में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी के मापन का वर्णन किया गया है।

रहस्य नंबर :2 डिमिन्यूटीव और जयीगण्टिक फॉर्म

रहस्य नंबर :3 सहस्त्र सिर वाला सांप या शेषनाग


रहस्य नंबर :1 सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का मापन का वर्णन हनुमान चालीसा में किया गया है...

दोस्तों क्या आप जानते हैं हनुमान चालीसा में सबसे पहले राष्ट्र यह है कि हनुमान चालीसा में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का वर्णन किया गया है अब आप यह सोच रहे होंगे कि कितनी बार हनुमान चालीसा पर डाली लेकिन उसमें तो है ऐसा कुछ लिखा नहीं है तो जरा हनुमान चालीसा के श्लोक क्रमांक 8 पर फिर से अपनी दृष्टि को बढ़ाएं आपको स्पष्ट पता चल जाएगा कि सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का वर्णन इसमें किया गया है।। हनुमान चालीसा में जिस श्लोक का वर्णन किया गया है वह श्लोक कुछ इस प्रकार है..



"जुग  सहस्त्र योजन पर भानु, लिल्योर ताहि मधुर फल जानू ।।

1 युग = 1200 वर्ष

1 सहस्त्र = 1000 वर्ष

1 योजन = 8 मील

1 मील = 1.6 किलोमीटर

तो युग सहस्त्र योजन का अर्थ हुआ कि इन तीनों का गुणनफल

12000*1000*8 = 96000000 मील =153600000 किलोमीटर 

तो यह तो यह गणना करने के पश्चात लगभग 15 करोड़ किलोमीटर हुए तो आजकल नासा जैसी बड़ी संस्थाएं भी सूर्य और पृथ्वी के बीच का अंतर लगभग 15 किलोमीटर ही बताती हैं । तो इस पंक्ति का मतलब यही है कि 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित सूर्य को मधुर फल समझकर खाने का प्रयास हनुमान जी द्वारा किया गया था।

रहस्य नंबर: 2 डिमिन्यूटीव और जयीगण्टिक फॉर्म

दोस्तो हमें बचपन से ही स्कूल में सिखाया गया है कि बिना किसी उर्जा के किसी भी चीज का द्रव्यमान बढ़ाना असंभव है, तो फिर जरा सोचिए कि क्या कोई इंसान अपने शरीर को बड़ा या छोटा कर सकता है..?

जब यह प्रश्न दिमाग में आता है तो आप सबके दिमाग में मार्वल सुपर हीरो एंट मैन याद आ रहा होगा जिसके पास अपने शरीर को बड़ा या छोटा करने की काबिलियत थी। अगर आपने उस पर गौर किया होगा तो हनुमान जी के पास भी ऐसी शक्ति थी।

हनुमान जी अपनी इच्छा अनुसार अपने शरीर को बड़ा या छोटा कर सकते थे । अगर अगर आपको कुछ समझ नहीं आ रहा है तो आप हनुमान चालीसा का श्लोक नंबर 9 और 10 को जरा ध्यान से पढ़िए। आप सब समझ जाएंगे। वह श्लोक कुछ इस प्रकार है ।

"सूक्ष्म रूप धरि सियंही दिखावा, विकट रुप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज संवारे।।

अब आप यह सोच रहे होंगे कि यदि हनुमान जी अपने शरीर को कितना छोटा या बड़ा कर सकते थे तो मैं बता दूं आपको इस सवाल का जवाब रामदास स्वामी जी के मारुति  श्लोक में मिलेगा ।


उसमें इसका साफ-साफ वर्णन किया गया है। कि हनुमान जी का आकार एक परमाणु से लेकर एक प्रमाण जितना बड़ा हो सकता है।

रहस्य नंबर: 3 हस्त्र सिर वाला सांप या शेष नाग 


हमारे हिंदू पुराणों और ग्रंथों में अनंत शेषनाग के बारे में लिखा गया है कहा जाता है कि अनंत सेना के एक ऐसे नाग हैं जिसके एक हजार से रहें और इतना ही नहीं इस अनंत नाक का संबंध सीधा समय से है कहा जाता है कि जब जब शेषनाग सीधा होता है तब समय भी आगे क्यों चलता है इसी चलने के कारण ब्रह्मांड का निर्माण होता है।

और जब यह शेषनाग कुंडलिक हो जाता है इससे संसार का विनाश हो जाता है। जब सब कुछ खत्म हो जाता है तब केवल और  केवल एक ही चीज बची रहती है वह है शेषनाग।
और क्या आप जानते हैं कि इन्हें शेष ही क्यों कहा जाता है क्योंकि जब सब कुछ खत्म हो जाता है तब केवल शेषनाग ही बचता है इसलिए इसको शेष कहा जाता है। हनुमान चालीसा में भी यह कहा गया है।

    सहस बदन तुम्हारो यश गावे,अस कही श्रीपति कंठ लगावे।।
    सनकादिक ब्रम्हादि मुनिशा, नारद सारद सहित अहिशा।।
     
    जम कुबेर दिगपाल जहां ते, कबी कोविद कह सके वहां ते।।
    तुम उपकार सुग्रीवहीं किन्हा, राम मिलाए राजपद दीन्हा।।

अर्थात वह हजार सीस वाला शेषनाग शेषनाग भी तुम्हारा ही यश गाएगा। जिससे हमें फिर से एक बार शेषनाथ के होने की पुष्टि होती है। वैसे तो समय से जुड़े शेषनाग के बारे में और भी कई रोचक चीजें मौजूद हैं लेकिन हमारी सभी प्रश्नों के उत्तर इसी श्लोक से मिल जाते हैं।

Conclusion
       
   तो दोस्तों अगर आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई हो तो कृपया इसे अपने तक ही ना रखें अपने मित्रों अपने परिवारजनों के साथ भी अवश्य शेयर करें । अगर कोई सुझाव देना चाहते हैं आप हमें तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें धन्यवाद!




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